पीलिया क्या है? कैसे होता है? क्या लक्षण हैं? कैसे बचें?

पीलिया क्या है? कैसे होता है? क्या लक्षण हैं? कैसे बचें?

पीलिया क्या है, पीलिया में त्वचा पीली पड़ जाती है और आंखें सफेद होने लगती हैं। नवजात बच्चे अकसर पीलिया की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में बच्चों का खास ख्याल रखने की जरूरत है। अगर शरीर पीला पड़ रहा है तो ये पीलिया का लक्षण हो सकता है। पीलिया को जॉन्डिस भी कहा जाता है। हालांकि, बच्चों में पीलिया होने पर चिंता की कोई बात नहीं है। लेकिन अगर बड़े इस बीमारी की चपेट में आ जाएं तो परेशानी बढ़ जाती है।  ज्यादातर पीलिया संक्रमण की बीमारी होती है जिसको हेपॅटाईटिस कहते है। लेकिन कुछ रोगीयों में यकृत उर्फ लिवर में पित्तरस को अटकाव होने से भी पीलिया होता है। पीलिया का कारण और प्रकार समझना जरुरी है। नवजात शिशु में भी पीलिया हो सकता है। इन सबके बारे में अब हम जानेंगे।

पीलिया क्या है

संक्रमक पीलिया का कारण है विषाणु। यह विषाणु ए, बी, या सी किस्म के होते है। ए किस्म का विषाणु दूषित आहार और पानी से फैलता है, और सामान्यत: अपने आप ठीक हो जाते है। लेकिन बी और सी किस्म के विषाणु असुरक्षित यौन संबंध, दूषित खून या दूषित इंजेक्शन के द्वारा फैलते है। बी और सी हेपॅटाईटिस याने यकृत शोथ के कारण लिवर सिकुडता है । आगे चलकर इसमें लिवर का कर्करोग संभव है। सी हेपॅटाईटिस सबसे खतरनाक है।  बच्चों का खास ख्याल रखने की जरूरत है। अगर शरीर पीला पड़ रहा है तो ये पीलिया का लक्षण हो सकता है। पीलिया को जॉन्डिस भी कहा जाता है। हालांकि, बच्चों में पीलिया होने पर चिंता की कोई बात नहीं है। लेकिन अगर बड़े इस बीमारी की चपेट में आ जाएं तो परेशानी बढ़ जाती है। जब शरीर में रेड ब्लड सेल्स एक तय अंतराल, यानी 120 दिन में टूटते हैं तो बिलिरुबिन नाम का एक बाई-प्रॉडक्ट बनता है। ये पदार्थ पहले, लीवर में जाता है और फिर धीरे-धीरे मल-मूत्र के साथ शरीर से निकल जाता है। लेकिन, अगर किसी कारण से रेड ब्लड सेल्स 120 दिनों से पहले टूट जाते हैं तो लीवर में बिलिरुबिन की मात्रा बढ़ जाती है। इसी से पीलिया होता है।

बीमारी की पहचान कैसे करे और इसके लक्षण क्या है:-

  • स्किन का पीला पड़ना
  • आंखों का सफेद होना
  • पेशाब का रंग गहरा पीला होना
  • मल का रंग सामान्य न होना
  • बुखार
  • पेट में दर्द
  • बदन में खुजली
  • वजन कम होना
  • चक्कर आना

मधुमेह बीमारी से बचाव के उपाय:-

  • फिटकरी को भूनकर बारीक पीसकर शीशी में सुरक्षित कर लें। इसे एक से तीन ग्राम की मात्रा में 20 ग्राम दही में मिलाकर सेवन करें। दिन में कई बार केवल दही खाते रहें। यदि दही उपलब्ध नहीं हो तो छाछ लें। एक सप्ताह में आप पूरी तरह ठीक हो जाएंगे।
  • सफेद चंदन 5 ग्राम, हल्दी पिसी हुई 6 ग्राम लें और दोनों को शहद में मिलाकर सात दिन तक चाटें।
  • मूली के हरे रंग का रस 450 ग्राम में चीनी इतना मिला लें कि मीठा हो जाएं। इसके बाद साफ कपड़े से छानकर पिएं। पीते ही लाभ मिलेगा। मात्र सात दिन में रोग जड़ से नष्ट हो जाएगा।
  • हेपॅटाईटिस ए में हल्का भोजन और बुखार के लिये पॅरासिटामॉल गोली लेना पर्याप्त है।
  • आयुर्वेद के अनुसार आरोग्यवर्धिनी गोली उपयुक्त है। इसको कुछ हफ़्तों तक लेना चाहिये।
  • घरेलू इलाज भी प्रचलित है। इसके लिये अरंड के एक पन्ने का रस हर दिन सुबह ले ले।
  • या हर दिन सुबह भुमि आमलकी का छोटा पौधा कूटकर खाये।
  • गिलोय की लता गले में लपेटने से भी फायदा होता है।
  • गिलोय के अर्क 50 ग्राम में 20 ग्राम शहद मिलाकर पीना पीलिया रोग में अत्‍यंत लाभकारी है।
  • टमाटर के 100 ग्राम रस में 3 ग्राम काला नमक मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें।
  • कड़वी तोरई का रस 2-3 बूंद नाक में चढ़ा लें । दवा अंदर जाते ही पीले रंग का पानी निकलना प्रारंभ हो जाएगा। पानी निकलकर कर रोगी एक ही दिन में ठीक हो जाता है।
  • फिटकरी कच्ची 20 ग्राम बारीक पीसकर 21 पुड़िया बनाकर प्रतिदिन एक पुड़िया मक्खन के साथ सेवन करें। पुराने से पुराना पीलिया जड़ से खत्म होगा।
  • बढ़िया सफेद फिटकरी भूनकर बारीक पीसकर किसी साफ शीशी में सुरक्षित रख लें । यदि पीलिया रोग एक माह से अधिक समय से है तो पहले दिन 1 ग्राम, दूसरे दिन 2 ग्राम, तीसरे दिन 3 ग्राम और उसके बाद 3 ग्राम नित्य फांककर ऊपर से दही का एक प्याला पी लें। मात्र सात दिनों में ही पुराने से पुराना रोग जड़ से नष्ट हो जाएगा ।
  • अरंड के पत्तों का रस 10 से 20 ग्राम तक गाय के कच्चे दूध में मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करें। इसके सेवन से 3 से 7 दिनों में पीलिया नष्ट हो जाता है।

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